ज़िन्दगी | Kiran Talreja

ज़िन्दगी का खेल अब जंग का मैदान बना है....
अपनों की हार में देखते खुद की जीत है....

लफ़्ज़ों से तहज़ीब हर कोई यहाँ गंवा बैठा है......
तौहीन करने का मानो सबको यहाँ अधिकार मिला है.....

खुदको ऊँचा दिखाने के खातिर हर कोई यहाँ लड़ रहा है....
अपनो को नीचा दिखा कर हर कोई नई रीत चला रहा है.....

ज़िन्दगी का खुदा जानो अब पैसा बना है......
उससे बड़ा ना कोई पैगंबर बचा है....

रिश्ते नाते अब कुछ नहीं एक मात्र दिखावा है.....
जीवन के हर मोड़ पर संघर्ष देखो नया खड़ा है.....

चुनौतियों से भरी हुई ज़िन्दगी सबकी यहाँ......
अपना ना किसी को मानो यहाँ हर कोई पराया है......

रिश्तों के सजदे में ना झुकना ये केवल एक छलावा है.......
ऐतबार ना किसी पे करना यहाँ हर कोई कर रहा तमाशा है......

उम्मीद रखना इस दुनिया में मानो सबसे बड़ा अब धोखा है.....
मदद अनजान की कर देना मानो अब कोई गुनाह बना है......

उम्मीद ना किसी से रखना ही एक मात्र समझदारी है.....
स्वार्थी, अहंकारी, फरेबी ही अब यहाँ पर प्राणी है.....

खुद पर बस विश्वास रखना कि यही एक अक्लमंदी है.....
जान लो, समझ लो, मतलबी ये दुनिया सारी है......

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